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कन्नौज

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  • मतदान की तारीख: 29 अप्रैल
  • जनसंख्या: 1808886
  • सुब्रत पाठक
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  • भारतीय जनता पार्टी

मामूली अंतर (लगभग 19 हजार वोट) से जीता है।


यह संसदीय क्षेत्र इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि इसका नेतृत्व तेजतर्रार समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया, कांग्रेस नेत्री शीला दीक्षित, सपा नेता मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव जैसे तीन-तीन पूर्व मुख्यमंत्री कर चुके हैं।


2014 के लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी  उम्मीदवार डिम्पल यादव ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार सौरभ पाठक को मात दी थी। तब डिम्पल यादव को कुल 4, 89, 164 लाख मत मिले थे, जबकि  सौरभ पाठक 4, 69, 257 लाख मत प्राप्त करके भी 

मामूली अंतर से पिछड़ गए थे।


2008 में परिसीमन के बाद इस संसदीय सीट का स्वरूप बदल गया। अब 5 विधानसभा क्षेत्र इस लोकसभा सीट के अंतर्गत आते हैं। वह हैं- छिबरामऊ, तिर्वा, कन्नौज, बिधूना और रसौलाबाद। खास बात यह है कि इन सभी 5 विधानसभा सीटों में से 4 पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है, जबकि महज 1 सीट कन्नौज पर समाजवादी पार्टी काबिज है। इस समय यूपी में भारतीय जनता पार्टी का ही शासन है, इसलिए समाजवादी पार्टी की राह यहां आसान तो कतई नहीं है। भले ही कांग्रेस ने यहां पर उनके खिलाफ अपना उम्मीदवार नहीं दिया है, लेकिन उनके ही चचिया ससुर शिवपाल यादव की पार्टी प्रसपा (प्रगतिशील समाजवादी पार्टी) का प्रत्याशी यदि उनकी सियासी आधार को खिसका दे, तो हैरत की बात नहीं होगी।


यदि इस सीट के जातिगत समीकरणों की बात करें तो यहां पर 83.05 प्रतिशत हिन्दू और 16.54 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। हिंदुओं में यादव 16 प्रतिशत, दलित 17 प्रतिशत हैं, जो डिम्पल की राह आसान बनाएंगे। लेकिन 10 प्रतिशत ठाकुर और 15 प्रतिशत ब्राह्मण के अलावा ओबीसी की लोध, कुशवाहा, पटेल और बघेल जैसी जातियों का झुकाव बीजेपी की ओर होने से यहां पर एक बार फिर कांटे की टक्कर होने के आसार दिखाई दे रहे हैं। अगर चुनाव आयोग के 2014 के आंकड़ों पर गौर करें तो इस सीट पर कुल 16 लाख 56 हजार 616 मतदाता हैं जिनमें से 8 लाख 81 हजार 776 पुरुष और 7 लाख 74 हजार 840 महिलाएं हैं।


इस सीट पर मुख्य मुकाबला समाजवादी पार्टी और बीजेपी के बीच ही होगा। 2014 के लोकसभा चुनावों में  भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार  सौरभ पाठक यहां दूसरे नंबर पर रहे थे। जबकि बसपा उम्मीदवार निर्मल तिवारी 1,27,755 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे थे। 


बता दें कि वर्ष 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगे के बाद हुए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के पश्चात भी जब यहां कमल खिलना सम्भव नहीं हुआ। तो फिर पाकिस्तान पर हुए एयर सर्जिकल स्ट्राइक का कितना असर पड़ेगा, यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन डिम्पल यादव को सौरभ पाठक से एक बार फिर कड़ी चुनौती मिल रही है, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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उत्तरप्रदेश के 80 संसदीय क्षेत्रों में से एक कन्नौज संसदीय क्षेत्र पर इस समय समाजवादी पार्टी का कब्जा है। समाजवादी नेत्री डिम्पल यादव, कन्नौज संसदीय क्षेत्र का लोकसभा में प्रतिनिधित्व करते हैं। कभी दिग्गज समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया की परंपरागत सीट रही कन्नौज अब समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव की पुश्तैनी सीट बन चुकी है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, उनके पुत्र पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और अखिलेश यादव की धर्मपत्नी डिम्पल यादव यहां से चुनाव जीत चुके हैं। श्री मती यादव फिलवक्त यहां से सांसद हैं और संघर्षरत प्रत्याशी भी। 2011 की जनगणना के आधार पर यदि देखें तो इस संसदीय क्षेत्र की आबादी लगभग 22 लाख है। सन 1967 से ही यह संसदीय क्षेत्र अस्तित्व में है। 


सन 1967 में जब इस प्रतिष्ठित सीट पर पहली बार चुनाव हुए तो संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के नेता राममनोहर लोहिया ने अपना कब्जा जमाया और लोकसभा पहुंचे। लेकिन 1971 में उन्होंने कांग्रेस नेता सत्यनारायण मिश्रा के हाथों यह सीट गंवा दी। जिससे कांग्रेस नेता श्री मिश्रा लोकसभा पहुं....